
बलरामपुर। प्रतापपुर विधायक शकुंतला पोर्ते के जाति प्रमाणपत्र सत्यापन विवाद से उपजे तनाव के बीच जिला प्रशासन ने बुधवार शाम बड़ा कदम उठाते हुए जिला कार्यालय बलरामपुर के 500 मीटर परिधि में धारा 144 लागू कर दी है। 11 दिसंबर को जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति की अहम बैठक होने वाली है, वहीं पिछली बैठक के बाद उत्पन्न तनाव और संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति की आशंका में यह आदेश जारी किया है।
तनाव बढ़ने की आशंका, हाईवे जाम के बाद प्रशासन चौकन्ना
इससे पूर्व सर्व आदिवासी समाज द्वारा जिला मुख्यालय में प्रदर्शन और नेशनल हाईवे-343 रोककर विरोध करने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया था। विवाद को लेकर जनप्रतिनिधियों और समाज के बीच तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगी हैं। जबकि विधायक पोर्ते ने अपना पक्ष रखते हुए सभी दस्तावेजों के वैध होने का दावा किया है, वहीं शिकायतकर्ता धन सिंह धुर्वे और समाज के प्रतिनिधि 11 दिसंबर को अंतिम निर्णय की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे माहौल में कल यानी गुरुवार 11 दिसंबर की सुनवाई से पहले भारी भीड़ जुटने के संकेत को लेकर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
जिला कार्यालय के आसपास रैली, धरना, भीड़ और हथियार पूर्णतः प्रतिबंधित
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी राजेन्द्र कटारा ने आदेश में कहा है कि, 11 दिसंबर को जिला कार्यालय में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की आशंका है, जिससे तनाव, कानून-व्यवस्था में व्यवधान और शासकीय संपत्ति को नुकसान की स्थिति बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला कार्यालय के 500 मीटर क्षेत्र में धारा 144 लागू की गई है।
जारी आदेश के अनुसार, 500 मीटर दायरे में किसी भी तरह की सभा, रैली, जुलूस, धरना, हड़ताल पूरी तरह प्रतिबंधित। एक स्थान पर चार से अधिक लोग एक साथ नहीं जुट सकेंगे। किसी भी प्रकार का हथियार, धारदार वस्तु या विस्फोटक पदार्थ साथ लेकर चलना वर्जित (धार्मिक परंपरा में रखे जाने वाले कृपाण को छोड़कर)।पुतला दहन, सड़क जाम, टायर जलाना, सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सख्त वर्जित। यह आदेश किसी भी दल, संगठन, संस्था या आम नागरिक पर लागू होगा यदि वे बिना अनुमति भीड़ इकट्ठा करते हैं।आदेश आगामी निर्देश तक प्रभावशील रहेगा। उल्लंघन करने वालों पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कल की बैठक पर टिकी निगाहें
विधायक शकुंतला पोर्ते के दस्तावेज जमा करने के बावजूद समाज ने निर्णय में देरी का आरोप लगाया है और 11 दिसंबर को अंतिम फैसला सुनाने की मांग की है। जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा कड़ी करने और धारा 144 लागू किए जाने के बाद अब पूरे जिले की नजरें कल होने वाली सुनवाई पर टिक गई हैं।
सत्यापन समिति की बैठक से पहले प्रशासन की इस सख्ती ने संकेत दे दिया है कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी।
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