
रामगढ़, (हि.स.) । जमीन विवाद को लेकर रामगढ़ कॉलेज रणक्षेत्र बन गया। यहां एक तरफ छात्र संगठन भू माफियाओं के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे, तो दूसरी तरफ सैकड़ों ग्रामीण अपने रास्ते की मांग को लेकर अड़े हुए थे। सोमवार को सुबह से शाम तक यहां तनाव की स्थिति बनी रही। दर्जनों पुलिस और दंडाधिकारी छात्रों और ग्रामीणों की बात सुनते रहे। हालांकि शाम तक भी अधिकारी किसी स्पष्ट निर्णय पर नहीं पहुंच पाए।
इस पूरे प्रकरण का पटाक्षेप रामगढ़ अंचल अधिकारी सत्येंद्र पासवान ने जांच का आश्वासन देकर किया है। हालांकि यह आश्वासन भी चंद दिनों के लिए ही है। अगर जल्द ही अधिकारी किसी ठोस निर्णय नहीं सुनाते हैं तो ग्रामीण और छात्रों के बीच की तनावपूर्ण स्थिति कभी भी खूनी संघर्ष का रूप ले सकती है।
रामगढ़ कॉलेज की बाउंड्री एक तरफ से खुली हुई है, जिस रास्ते का उपयोग लगभग ढाई हजार घर के लोग करते हैं। छात्र संगठन के नेता राजेश ठाकुर का कहना है कि रामगढ़ कॉलेज की अपनी जमीन है। यहां के छात्रों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से वह खुला हुआ रास्ता उचित नहीं है। रामगढ़ कॉलेज को 17 एकड़ जमीन आवंटित है। कॉलेज अभी भी 13 एकड़ भूमि पर ही सिमटा हुआ है। लगभग चार एकड़ जमीन का अतिक्रमण भू माफियाओं के द्वारा किया जा चुका है। एक तरफ की बाउंड्री को तोड़कर भूमाफियाओं ने उसे रास्ता बनाने की साजिश रची है। जिला प्रशासन से छात्र संगठन ने यह मांग की है कि उस रास्ते को बंद किया जाए ताकि कॉलेज के छात्र-छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ बंद हो सके। साथ ही कॉलेज की जमीन की एक बार फिर मापी होनी चाहिए ताकि 17 एकड़ जमीन पर कॉलेज प्रबंधन का कब्जा हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि रामगढ़ कॉलेज अपनी पूरी जमीन पर कायम है। जिस रास्ते का उपयोग वर्षों से ग्रामीण करते आ रहे हैं, वह रास्ता आम है। ग्रामीणों का कहना है कि उस रास्ते पर लगभग ढाई हजार घरों की आबादी आश्रित है। अगर वह रास्ता बंद हो जाएगा तो विकट समस्या उत्पन्न हो जाएगी। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कॉलेज से सटे सैकड़ों घर इस बात का प्रमाण है कि उस आम रास्ते का उपयोग वर्षों से होता आ रहा है।
इस पूरे प्रकरण में रामगढ़ अंचल अधिकारी सत्येंद्र पासवान ने कहा कि वह कॉलेज की जमीन और ग्रामीणों के जमीन के विवाद को लेकर जांच कराएंगे।
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