
रांची। रांची में प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर को लेकर उस वक्त असाधारण स्थिति बन गई, जब झारखंड पुलिस जांच के लिए सीधे ईडी कार्यालय पहुंच गई। मामला एक ऐसे गंभीर आरोप से जुड़ा है, जिसमें पूछताछ के नाम पर एक व्यक्ति के साथ हिंसा किए जाने का दावा किया गया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि ईडी ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
राजधानी रांची स्थित प्रवर्तन निदेशालय कार्यालय में मंगलवार को उस समय तनाव का माहौल बन गया, जब झारखंड पुलिस की टीम जांच के सिलसिले में वहां पहुंची। सदर डीएसपी और एयरपोर्ट थाना प्रभारी की मौजूदगी में पुलिस ने मामले से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू की। एहतियातन ईडी ने केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी तैनात कर दिया है।
यह पूरा मामला चुटिया क्षेत्र निवासी संतोष कुमार की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने एयरपोर्ट थाना में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में ईडी के दो अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें पूछताछ के बहाने कार्यालय बुलाया गया और वहां उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई।
संतोष कुमार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जुड़े हैं और वर्तमान में स्वर्णरेखा परियोजना से संबंधित कार्यालय में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं। उन पर शहरी जलापूर्ति योजना से जुड़ी राशि में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है। इस मामले में पहले भी पुलिस कार्रवाई हो चुकी है और फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं। इसी प्रकरण की जांच ईडी द्वारा की जा रही है।
प्राथमिकी के अनुसार 12 जनवरी की सुबह उन्हें फोन कर ईडी कार्यालय बुलाया गया था। तय समय से पहले वे कार्यालय पहुंच गए। आरोप है कि दोपहर बाद उन्हें एक अधिकारी के कक्ष में बुलाया गया, जहां पहले से मौजूद दूसरे अधिकारी के साथ मिलकर उन पर आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। इनकार करने पर कथित रूप से उनके साथ शारीरिक हिंसा की गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि उनसे जबरन एक आवेदन लिखवाया गया, जिसमें अगली तारीख पर पेश होने की बात दर्ज थी। देर रात तक उन्हें कार्यालय में रोके रखा गया ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें। छोड़े जाने के समय उन्हें और उनके परिजनों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।
आरोपों के मुताबिक मारपीट इतनी गंभीर थी कि उनके सिर में गहरी चोट आई और खून बहने लगा। बाद में उन्हें सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां सिर में टांके लगाए गए। पीड़ित का दावा है कि अस्पताल में भी उन्हें दबाव में रखा गया और चोट की असल वजह न बताने को कहा गया। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता का आरोप है कि सबूत मिटाने के इरादे से उनकी खून से सनी टी-शर्ट उतरवाकर दूसरी टी-शर्ट पहनाई गई और एक लिखित बयान पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए, जिसे पढ़ने तक की अनुमति नहीं दी गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एयरपोर्ट थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि जांच एजेंसियों पर दबाव डालने की कोशिशें लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि झारखंड को अराजकता की राह पर नहीं जाने दिया जाएगा और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में दोषियों को सजा जरूर मिलेगी।
फिलहाल, पूरे प्रकरण पर सभी की नजर पुलिस जांच और ईडी की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक मोर्चे पर भी और गरमाने के संकेत दे रहा है।
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