
बलरामपुर। Kanhar River Migratory Birds की आमद ने सर्दियों के मौसम में शहर को प्रकृति का एक अनमोल तोहफा दिया है। ठिठुरती ठंड के बीच कन्हर नदी का शांत जल एक बार फिर विदेशी प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से जीवंत हो उठा है। दूर-दराज़ देशों से आए ये मेहमान न केवल प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ा रहे हैं, बल्कि स्वस्थ पर्यावरण और सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र का भी संकेत दे रहे हैं।
Kanhar River Migratory Birds की वार्षिक वापसी ने बढ़ाई रौनक
हर साल शीतकाल के आगमन के साथ Kanhar River Migratory Birds शहरवासियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। इसी कड़ी में इस वर्ष भी साइबेरियन डक का एक जोड़ा कन्हर नदी क्षेत्र में देखा गया है। जानकारी के अनुसार करीब पंद्रह दिन पहले यह दुर्लभ प्रवासी पक्षी नदी के तटवर्ती इलाके में नजर आया।

शांत जल और सुरक्षित माहौल बना प्रवासी पक्षियों का ठिकाना
यह जोड़ा प्रायः नदी के मध्य स्थित टापू पर, राम मंदिर घाट के सामने, सुबह और शाम के समय दिखाई देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वच्छ जल, शांत वातावरण और भोजन की सहज उपलब्धता ने Kanhar River Migratory Birds के लिए इस क्षेत्र को सुरक्षित ठिकाना बना दिया है।

हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आते हैं विदेशी मेहमान
जानकार बताते हैं कि साइबेरिया जैसे अत्यंत ठंडे क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर Kanhar River Migratory Birds भारत के अपेक्षाकृत गर्म इलाकों में शीतकाल बिताने आते हैं। यह यात्रा उनकी अद्भुत सहनशक्ति और प्रकृति से तालमेल का उदाहरण है।
पर्यावरणीय संतुलन का मजबूत संकेत
स्थानीय पक्षी प्रेमियों का मानना है कि यह जोड़ा लगातार कई वर्षों से इसी क्षेत्र का रुख कर रहा है। यह तथ्य Kanhar River Migratory Birds के लिए कनहर नदी के अनुकूल और सुरक्षित पर्यावरण की पुष्टि करता है। इन दिनों नदी किनारे सुबह-शाम दूरबीन और कैमरे लिए लोगों की मौजूदगी आम हो गई है।

बच्चों और युवाओं में बढ़ी जागरूकता
Kanhar River Migratory Birds को देखने के लिए बच्चों और युवाओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। वे न केवल इन पक्षियों को करीब से देखने के लिए उत्सुक हैं, बल्कि उनके बारे में जानकारी हासिल कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी हो रहे हैं।
प्रशासन और नागरिकों से अपील
नगरवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि Kanhar River Migratory Birds की सुरक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरती जाए। शिकार, अनावश्यक शोर और मानवीय हस्तक्षेप से बचाव के साथ-साथ नदी क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
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