
रांची। देवघर एम्स में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और बर्न वार्ड की व्यवस्था से जुड़े मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को देवघर एम्स से जवाब तलब किया है और संबंधित शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह सुनवाई सांसद निशिकांत दुबे और न्यायालय के स्वतः संज्ञान से दायर जनहित याचिका के तहत हुई।
सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। अदालत ने देवघर एम्स से पूछा कि वहां प्रतिदिन कितने बर्न के मामले आते हैं और इन मरीजों के इलाज के लिए क्या व्यवस्थाएं हैं। इसके अलावा अदालत ने पूर्व सुनवाई में एम्स के अधिवक्ता से यह भी पूछा था कि क्या बर्न वार्ड में इमरजेंसी इलाज की सुविधा शुरू हो चुकी है।
दरअसल, यह मामला 23 अगस्त 2022 से जुड़ा है, जब दुमका में घर में सो रही नाबालिग छात्रा पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई थी। गंभीर रूप से जलने के बाद उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया और स्थिति गंभीर होने पर रिम्स रांची स्थानांतरित किया गया। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेकर मामले की जांच शुरू की।
सांसद निशिकांत दुबे ने भी देवघर एम्स में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बर्न वार्ड को तत्काल सक्रिय करने का आग्रह किया है।
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