
नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम बढ़ा दिया है। अत्याधुनिक निगरानी और इमेजिंग क्षमताओं से लैस ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण के साथ देश की सुरक्षा, विज्ञान और निजी अंतरिक्ष उद्योग तीनों को नई मजबूती मिली है।
Indian Space Research Organisation ने सोमवार सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र से PSLV-C62/EOS-N1 मिशन को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में रवाना किया। इस मिशन के जरिए एक प्रमुख अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ के साथ 14 अन्य सह-यात्री सैटेलाइट्स को कक्षा में स्थापित किया गया।
इस मिशन में उपयोग किए गए पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की यह 64वीं उड़ान रही। सभी सैटेलाइट्स को सूर्य-समकालिक कक्षा में तैनात किया जा रहा है, जहां से वे पृथ्वी की सतह पर लगातार और सटीक निगरानी कर सकेंगे। ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट को करीब 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाना है।
‘अन्वेषा’ को Defence Research and Development Organisation द्वारा विकसित किया गया है। यह एक अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे रक्षा और रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी खासियत यह है कि यह घने जंगलों, झाड़ियों, बंकरों या छिपी हुई संरचनाओं तक की स्पष्ट जानकारी जुटाने में सक्षम है।
15 सैटेलाइट, कई देश, एक मिशन
इस मिशन के तहत कुल 15 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए हैं, जिनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी सैटेलाइट शामिल हैं। हैदराबाद की निजी कंपनी ध्रुवा स्पेस ने अपने 7 सैटेलाइट इसी लॉन्च के जरिए कक्षा में स्थापित किए। वहीं फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम के सैटेलाइट भी इस मिशन का हिस्सा रहे।
यह मिशन इसरो के वर्ष 2026 का पहला सैटेलाइट प्रक्षेपण है और इसे New Space India Limited द्वारा व्यावसायिक रूप से संचालित किया गया। यह अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट से जुड़ा भारत का नौवां कॉमर्शियल मिशन भी है, जिसे निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
क्या है अन्वेषा की खास तकनीक
अन्वेषा ‘हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग’ तकनीक पर आधारित है। यह तकनीक सामान्य सैटेलाइट्स की तुलना में रोशनी के सैकड़ों सूक्ष्म रंगों को पहचान सकती है। इसी क्षमता के कारण यह मिट्टी की प्रकृति, वनस्पति, जल स्रोत, खनिज, मानव गतिविधियों और सैन्य हलचलों की बेहद बारीकी से पहचान कर सकता है।
इससे पहले भारत ने वर्ष 2018 में अपनी पहली हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट HySIS लॉन्च की थी। अन्वेषा उसी का उन्नत संस्करण है, जिसमें ज्यादा स्पेक्ट्रल बैंड्स और बेहतर रिजॉल्यूशन शामिल किया गया है।
रक्षा और रणनीति के लिए अहम हथियार
विशेषज्ञों के मुताबिक, अन्वेषा सैटेलाइट का उपयोग सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर, जमीन की बनावट के विश्लेषण और सैन्य अभियानों की रणनीति तैयार करने में किया जाएगा। यह तकनीक यह भी बता सकती है कि किसी इलाके में सैन्य वाहनों की आवाजाही संभव है या नहीं।
इसके अलावा जंगलों, खनन क्षेत्रों, पर्यावरण निगरानी और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के आकलन में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। 3D इमेजिंग और डेटा सिमुलेशन के जरिए युद्ध जैसी परिस्थितियों का आभासी अभ्यास भी संभव होगा।
कुल मिलाकर, PSLV-C62 मिशन न सिर्फ भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि यह संकेत भी है कि देश अब अंतरिक्ष और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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