
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। जनपद पंचायत वाड्रफनगर में वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान विभिन्न निर्माण कार्यों में फर्जी बिल लगाकर शासकीय राशि के गबन के मामले में पुलिस को अहम सफलता मिली है। करीब 30 लाख रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े में वर्षों से फरार चल रहे तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
बलरामपुर पुलिस से प्राप्त विज्ञप्ति के अनुसार, जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत तुगंवा, गुडरू, जमई एवं पेंडारी में मुरम मिट्टी, सड़क, सह पुलिया, तटबंध तथा डब्ल्यूबीएम निर्माण कार्यों के नाम पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी भुगतान किया गया। जांच में यह सामने आया कि इन कार्यों के माध्यम से कुल 30,02,449 रुपये की शासकीय राशि का गबन किया गया।
इस संबंध में पुलिस चौकी वाड्रफनगर, थाना बसंतपुर में अपराध क्रमांक 50/2020 धारा 467, 468, 409, 420 एवं 34 भारतीय दंड संहिता के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट एवं अभिलेखों के आधार पर विवेचना प्रारंभ की गई।
विवेचना के दौरान पूर्व में कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा अश्विनी कुमार तिवारी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। इसके अलावा आरोपित सप्लायर हरिहर यादव, कुजलाल साहू तथा रोजगार सहायक गिरीश यादव को भी प्रकरण में गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच के दौरान आरोपित अश्विनी कुमार तिवारी के कथन में यह तथ्य सामने आया कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रवण कुमार मरकाम उर्फ एस. के. मरकाम सहित अन्य के साथ मिलकर शासकीय राशि का गबन किया गया। इसके आधार पर वर्षों से फरार चल रहे तत्कालीन CEO श्रवण कुमार मरकाम को पुलिस ने हिरासत में लेकर वाड्रफनगर लाकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपित द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने पर उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
पुलिस अनुविभागीय अधिकारी वाड्रफनगर द्वारा प्रकरण में संबंधित कर्मचारियों एवं सप्लायरों के धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कथन कराए जाकर न्यायालय में पूरक चालान प्रस्तुत किया जा चुका है। मामले में अन्य फरार आरोपितों की तलाश लगातार जारी है।
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