Close Menu
Offbeat News Offbeat News
    🔴 OFFBEAT LATEST NEWS

    एनीकट के बीच फंसा युवक, अचानक तेज धार में समाया; 500 मीटर तक दिखा बहता

    August 23, 2026

    उबका बांध में रिसाव, ग्रामीणों को सता रहा टूटने का डर; 100 एकड़ फसल और कई घरों पर खतरा

    August 22, 2026

    रामगढ़ के इस्पात प्लांट में जोरदार ब्लास्ट, तीन इंजीनियरों की मौत

    August 22, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp
    Offbeat News Offbeat News
    Trending
    • एनीकट के बीच फंसा युवक, अचानक तेज धार में समाया; 500 मीटर तक दिखा बहता
    • उबका बांध में रिसाव, ग्रामीणों को सता रहा टूटने का डर; 100 एकड़ फसल और कई घरों पर खतरा
    • रामगढ़ के इस्पात प्लांट में जोरदार ब्लास्ट, तीन इंजीनियरों की मौत
    • आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने सुधा डेयरी में समझी दूध से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया
    • ब्रेकिंग : राजपुर-कुसमी मार्ग पर भीषण हादसा, ट्रक-पिकअप की आमने-सामने टक्कर; 3 मजदूरों की मौत
    • 3 साल के बच्चे की मौत के बाद पुलिस पहुंची तो झोलाछाप डॉक्टर ने किया लकवा का नाटक, जेल दाखिल
    • हाई कोर्ट के आदेश से मिली राहत, लेकिन नौकरी जाने का डर कायम; बोले- दोषियों को सजा दें, सही चयनितों को नहीं
    • झोलाछाप के इलाज से और कितनी जानें जाएंगी? बलरामपुर में तीन साल के मासूम की मौत, पहले भी कई लोगों की जा चुकी है जान
    Facebook X (Twitter) Instagram
    • 🏠 Home
    • 🚨 Crime
    • 🇮🇳 National
    • 🎓 Education
    • 🎬 Entertainment
    • ❤️ Health
    • 🌿 Life
    • 📍 State
    • 🔥 Offbeat
    • 🏛️ Politics
    • 💼 Business
    • 💰 Finance
    • 💻 Tech
    • 🏏 Sports
    • 🔐 Login
    Offbeat News Offbeat News
    🟠
    • 🏠 Home
    • 🚨 Crime
    • 🇮🇳 National
    • 🎓 Education
    • 🎬 Entertainment
    • ❤️ Health
    • 🌿 Life
    • 📍 State
    • 🔥 Offbeat
    • 🏛️ Politics
    • 💼 Business
    • 💰 Finance
    • 💻 Tech
    • 🏏 Sports
    • 🔐 Login
    Home»National»‘बा’ और बापू: तकरार, संघर्ष और उस अटूट प्रेम की कहानी, जिसने महात्मा गांधी को सिखाया अहिंसा का पहला पाठ
    National

    ‘बा’ और बापू: तकरार, संघर्ष और उस अटूट प्रेम की कहानी, जिसने महात्मा गांधी को सिखाया अहिंसा का पहला पाठ

    Offbeat NewsBy Offbeat NewsApril 10, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Threads
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Email WhatsApp

    नई दिल्ली। महात्मा गांधी के महानायक बनने की यात्रा में अक्सर एक नाम भुला दिया जाता है। जबकि वह शख्सियत महात्मा गांधी की सबसे बड़ी संबल और शक्ति थीं। गांधीजी के जीवन से इतनी गहराई से जुड़ने वाली वे एकमात्र शख्सियत थीं, जिनकी जगह कोई और नहीं ले सकता था। संभवतः वे अकेली ऐसी व्यक्ति थीं जो बापू से असहमति जताने और उन्हें उनकी त्रुटियों का बोध कराने का साहस रखती थीं। हम बात कर रहे हैं महात्मा गांधी की पत्नी और समाज सेविका ‘कस्तूरबा गांधी’ की, जिन्हें देशवासी ‘बा’ कहकर पुकारते थे।

    11 अप्रैल 1869 में पोरबंदर में जन्मीं कस्तूरबा, गोकुलदास और व्रजकुंवर की पुत्री थीं। उनके पिता एक प्रमुख व्यापारी थे, जो अफ्रीका और मध्य पूर्व के अनाज, कपड़े और कपास के बाजारों में व्यापार करते थे और एक समय पोरबंदर के महापौर भी रह चुके थे। यह परिवार मोहनदास गांधी के पिता करमचंद के परिवार का करीबी मित्र था। करमचंद पोरबंदर के दीवान थे। दोनों परिवारों के माता-पिता ने अपने बच्चों की शादी करवाकर अपनी दोस्ती को और मजबूत किया। बच्चों की सगाई 7 साल की उम्र में हुई थी और उनकी शादी 1882 में हुई जब वे 13 साल के थे।

    WhatsApp Group Join Now
    Facebook Page Follow Us

    ‘बा’ सिर्फ महात्मा गांधी की पत्नी नहीं, बल्कि अपने आप में एक शख्सियत भी थीं, जिनका तेज बापू के विराट व्यक्तित्व की आभा में ओझल नहीं हुआ था। वह एक पत्नी के साथ स्वतंत्र महिला भी थीं। इसके प्रमाण हमें कई बार मिलते हैं। महात्मा गांधी के जीवन और कार्यों पर आधारित वेबसाइट ‘एमके गांधी.ओआरजी’ के अनुसार, इतिहासकार विनय लाल लिखते हैं, “कस्तूरबा ने कभी भी आसानी से अपने पति की इच्छाओं को स्वीकार नहीं किया और गांधी की आत्मकथा स्वयं उनकी दृढ़ता और स्वतंत्र निर्णय क्षमता का उल्लेखनीय प्रमाण प्रस्तुत करती है, और उन तीखे मतभेदों का भी जो उनके बीच तब हुए जब विवाह के पहले दो दशकों में उन्होंने अनुचित रूप से उन्हें अपने नियंत्रण में लाने की कोशिश की।”

    गांधीजी की इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका की लंबी यात्राओं के दौरान कस्तूरबा को वर्षों तक उनसे दूर रहना पड़ा। अपने दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने इस लंबे समय को धैर्यपूर्वक काटा। अक्षर ज्ञान न होने के कारण उनके लिए संदेशों का आदान-प्रदान करना एक बड़ी चुनौती थी। इतिहासकार अपर्णा बसु के अनुसार, ‘बा’ में शारीरिक और नैतिक साहस कूट-कूट कर भरा था। गंभीर बीमारियों पर विजय पाना हो, दक्षिण अफ्रीका के शुरुआती संघर्ष हों या जेल की कठोर यातनाएं, उन्होंने हर परिस्थिति का डटकर सामना किया। वास्तव में, कारावास के दौरान वे अपनी साथी महिला कैदियों के लिए संबल और प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत थीं।”

    1914 में जब गांधी और कस्तूरबा स्थायी रूप से भारत लौट आए और गांधी ने 1917 में भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में प्रवेश किया, तो वह एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में अधिक उभरीं। महात्मा गांधी ने अपनी जीवनी में इसके बारे में लिखा, “मेरे पूर्व अनुभव के अनुसार, वह बहुत जिद्दी थीं। मेरे तमाम दबाव के बावजूद वह अपनी मर्जी से ही काम करती थीं। इससे हमारे बीच कभी थोड़े समय के लिए तो कभी लंबे समय के लिए अलगाव हो जाता था। लेकिन जैसे-जैसे मेरा सार्वजनिक जीवन बढ़ता गया, मेरी पत्नी का व्यक्तित्व निखरता गया और उन्होंने जानबूझकर खुद को मेरे काम में समर्पित कर दिया।”

    वह सरल और सौम्य स्वभाव की थीं। उनकी सौम्यता में ही उनकी प्रबल शक्ति झलकती थी। सालों से उन्होंने अपने पति और उनकी विभिन्न भूमिकाओं का डटकर सामना किया। उन्होंने भारत में और उससे पहले दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता की खोज में उनका साथ दिया।

    दरअसल, जैसा कि इतिहासकार बताते हैं, वह उन पहले सत्याग्रहियों में से एक थीं, या अहिंसक प्रतिरोधियों में से एक थीं, जिन्हें दक्षिण अफ्रीकी सरकार के सभी गैर-ईसाई विवाहों को अमान्य घोषित करने के फैसले का विरोध करने के लिए फीनिक्स से ट्रांसवाल भेजा गया था।

    स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सिर्फ महात्मा गांधी को दिए गए समर्थन का एक हिस्सा नहीं थी, बल्कि यह उनके लिए एक गहरा लगाव था। वह अब कस्तूर ‘बा’ बन चुकी थीं। महात्मा गांधी ने स्वयं उन्हें अहिंसा का पहला पाठ सिखाने वाली गुरु माना था।

    जब भारत छोड़ो आंदोलन जोर पकड़ने लगा, तब महात्मा गांधी को बॉम्बे के पास शिवाजी पार्क में एक जनसभा को संबोधित करने से पहले ही जेल में डाल दिया गया। महात्मा गांधी चाहते थे कि कस्तूरबा उनकी जगह लें, यह भांपते हुए कि पुलिस उन्हें भी रोककर जेल में डाल देगी।

    सभा में जाते समय उन्हें रोक लिया गया। उस दिन पार्क में एक लाख लोग मौजूद थे और उन्हें देखकर वे उत्साह से झूम उठे, लेकिन उन्हें बंदी बनाकर बॉम्बे की आर्थर रोड जेल भेज दिया गया। कस्तूरबा ने सुशीला नायर से कहा, “मुझे लग रहा है कि मैं जिंदा नहीं लौट पाऊंगी।”

    जिस कोठरी में उन्हें रखा गया था, वह गंदी थी और वे बीमार पड़ गईं। कुछ दिनों बाद, उन्हें पुणे के आगा खान पैलेस ले जाया गया, जहां महात्मा गांधी को भी नजरबंद रखा गया था। यह उनकी आखिरी कैद थी।

    22 फरवरी 1944 की शाम को, उन्होंने आगा खान पैलेस डिटेंशन कैंप में बापू की गोद में अंतिम सांस ली और 23 फरवरी 1944 को डिटेंशन कैंप के परिसर में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

    उनके पति अंत तक चिता को देखते रहे और जब किसी ने उन्हें आराम करने के लिए कहा, तो उन्होंने कहा, “यह अंतिम विदाई है, 62 वर्षों के साझा जीवन का अंत। मुझे अंतिम संस्कार पूरा होने तक यहीं रहने दीजिए।” उस शाम, प्रार्थना के बाद उन्होंने कहा, “मैं बा के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकता।”

    इसे भी पढ़ें……….

    BIG BREAKING : अंबिकापुर में दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोपी गिरफ्तार, 8 दिन बाद पुलिस को मिली बड़ी सफलता

    Post Views: 398
    Share. Facebook Twitter LinkedIn Email WhatsApp
    Previous ArticleBIG BREAKING : अंबिकापुर में दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोपी गिरफ्तार, 8 दिन बाद पुलिस को मिली बड़ी सफलता
    Next Article झारखंड : तीसरी कक्षा की छात्रा से कथित रेप के आरोप में हेडमास्टर गिरफ्तार, जांच के आदेश
    Offbeat News
    • Website

    ऑफबीट न्यूज़ वर्ष 2022 से एक स्वतंत्र और भरोसेमंद डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के रूप में सुधि पाठकों की सेवा कर रहा है। यह झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों की अहम, जमीनी और ऑफबीट खबरें निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करता है। ऑफबीट न्यूज़ का उद्देश्य जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देना और सच्ची पत्रकारिता को मजबूत करना है। इसके सीनियर एडिटर डॉक्टर अमरनाथ पाठक और रेजिडेंट एडिटर विष्णु पांडेय हैं, जिनके पास दशकों का पत्रकारिता अनुभव है। अनुभव, विश्वसनीयता और जनपक्षधर सोच के साथ ऑफबीट न्यूज़ लगातार पाठकों का भरोसा जीत रहा है।

    Related Posts

    लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में सावन सोमवार पर भगदड़, 7 श्रद्धालुओं की मौत

    August 17, 2026

    गजनी के विलेन प्रदीप रावत का निधन, 74 की उम्र में ली अंतिम सांस

    August 4, 2026

    निर्णायक बढ़त के बाद प्रशांत किशोर बोले- यह मेरी नहीं, बांकीपुर की जनता की जीत; बिहार की राजनीति को नई दिशा देने का जनादेश

    August 3, 2026

    शनैः-शनैः जीत की ओर बढ़ रहे प्रशांत किशोर, 20वें चरण में 11,621 वोटों की बढ़त

    August 3, 2026
    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Latest News

    एनीकट के बीच फंसा युवक, अचानक तेज धार में समाया; 500 मीटर तक दिखा बहता

    August 23, 2026

    उबका बांध में रिसाव, ग्रामीणों को सता रहा टूटने का डर; 100 एकड़ फसल और कई घरों पर खतरा

    August 22, 2026

    रामगढ़ के इस्पात प्लांट में जोरदार ब्लास्ट, तीन इंजीनियरों की मौत

    August 22, 2026

    आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने सुधा डेयरी में समझी दूध से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया

    Sponsor: RKDF University, RanchiAugust 22, 2026
    Latest Posts
    Featured

    देश में अबतक 56 करोड़ से ज्यादा लोगों को लगी वैक्सीन, पिछले 24 घंटे में 55 लाख से ज्यादा लोगों को लगा टीका

    October 27, 2022

    Offbeat News is dedicated to delivering fresh perspectives, unheard stories, and credible journalism that keeps you informed and inspired.

    We're social. Connect with us:

    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest YouTube
    Quick Links
    • Home
    • Sports
    • Health
    Follow Us
    • Facebook
    • WhatsApp
    Recent Post
    • एनीकट के बीच फंसा युवक, अचानक तेज धार में समाया; 500 मीटर तक दिखा बहता
    • उबका बांध में रिसाव, ग्रामीणों को सता रहा टूटने का डर; 100 एकड़ फसल और कई घरों पर खतरा
    • रामगढ़ के इस्पात प्लांट में जोरदार ब्लास्ट, तीन इंजीनियरों की मौत
    • आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने सुधा डेयरी में समझी दूध से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया
    • ब्रेकिंग : राजपुर-कुसमी मार्ग पर भीषण हादसा, ट्रक-पिकअप की आमने-सामने टक्कर; 3 मजदूरों की मौत
    © 2026 Designed by offbeatnews.in | An MSME-Registered News Portal

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.