
बलरामपुर। छत्तीसगढ़–उत्तर प्रदेश सीमा से सटे गांव सागोबांध में उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब आरोपितों की धरपकड़ के इरादे से पहुंची सनावल थाना पुलिस को ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस के गांव में दाखिल होते ही हालात तेजी से बिगड़ने लगे और देखते ही देखते हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई।
वाहन को घेरकर विरोध, बढ़ा तनाव
जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम के गांव पहुंचते ही कुछ ग्रामीणों ने पुलिस वाहन को चारों ओर से घेर लिया और सवाल-जवाब शुरू कर दिए। देखते ही देखते भीड़ बढ़ती गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई।
नंबर प्लेट बना विवाद की वजह
विवाद उस समय और बढ़ गया, जब ग्रामीणों ने पुलिस वाहन की नंबर प्लेट पर कागज चिपका हुआ देखा। इसे लेकर ग्रामीणों ने संदेह जताया और पुलिस की मौजूदगी पर सवाल खड़े किए। आशंका और अविश्वास के चलते माहौल पूरी तरह गरमा गया।

संयम दिखाते हुए पुलिस ने टाली कार्रवाई
हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए सनावल पुलिस ने सूझबूझ का परिचय दिया। किसी भी तरह की बल प्रयोग की स्थिति से बचते हुए पुलिस टीम ने मौके पर कोई कार्रवाई नहीं की और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से गांव से वापस लौट आई। इस दौरान कुछ समय तक क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
पहले भी मिल चुकी है नाकामी
इस संबंध में सनावल थाना प्रभारी बृजलाल भारद्वाज ने बताया कि, सीमावर्ती इस क्षेत्र में पूर्व में भी कई बार पुलिस कार्रवाई के लिए पहुंची है, लेकिन हर बार आरोपितों को पहले ही सूचना मिल जाने के कारण वे फरार हो जाते हैं। इसी वजह से इस बार पुलिस टीम को पहचान छिपाकर भेजा गया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था सर्वोपरि है और पूरे घटनाक्रम की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। साथ ही सीमावर्ती इलाकों में भविष्य की कार्रवाई को लेकर रणनीति पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
सीमावर्ती इलाकों में समन्वय पर सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस कार्रवाई, आपसी समन्वय और स्थानीय सहयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन आगे किस तरह की रणनीति अपनाता है, ताकि कानून का शिकंजा मजबूत किया जा सके।
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