
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलरामपुर के बाहर शिक्षक राजेंद्र देवांगन अपने आठ वर्षीय पुत्र हर्षित देवांगन के साथ दो दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। शिक्षक का कहना है कि निलंबन से बहाल होने और ज्वाइनिंग के बावजूद उन्हें अब तक विद्यालय का प्रभार नहीं दिया गया, जिससे वे मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।
ऑफबीट न्यूज से बातचीत में राजेंद्र देवांगन ने बताया कि वे बसंतपुर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्रभारी प्राचार्य के पद पर पदस्थ थे। वे मूल रूप से कोरबा जिले के उमरेली के निवासी हैं और पिछले 18 वर्षों से बलरामपुर जिले में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालय के ही कुछ व्याख्याताओं द्वारा 16 नवंबर 2025 को अनुशासनहीनता के आरोप में सरगुजा कमिश्नर से शिकायत की गई थी, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।
राजेंद्र देवांगन के अनुसार, 5 दिसंबर 2025 को उन्हें बहाल कर दिया गया और 11 दिसंबर 2025 को उन्होंने पुनः ज्वाइनिंग भी कर ली, इसके बावजूद उन्हें विद्यालय का प्रभार नहीं सौंपा गया। उनका आरोप है कि वे विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक हैं, लेकिन उनके कनिष्ठ शिक्षक उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं और जानबूझकर प्रभार नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 3 जनवरी से वे डीईओ कार्यालय के बाहर अपने पुत्र के साथ धरने पर बैठे हैं और 4 जनवरी से दोपहर 12 बजे के बाद से उन्होंने भोजन और पानी पूरी तरह त्याग दिया है। उनका कहना है कि वे केवल अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि उन्हें विधिवत प्रभार दिया जाए तथा उन्हें परेशान करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई हो।
वहीं, इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने बताया कि राजेंद्र देवांगन के खिलाफ कई मामलों में जांच प्रक्रियाधीन है। उनके कार्यकाल के दौरान वित्तीय अभिलेखों में अनियमितता सामने आई है और कई दस्तावेजों का स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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