
बलरामपुर। अवैध धान परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजस्व विभाग और पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार और मोस्ट वांटेड आरोपी को कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किया गया, जिसने वाहन रोकने पर राजस्व टीम से विवाद और मारपीट की कोशिश की। आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध धान कारोबार पर निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है।
जानकारी अनुसार, मामले का विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 15 जनवरी 2026 को प्रातः राजस्व विभाग की टीम को अवैध धान परिवहन की पुख्ता सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर टीम पचावल से त्रिशुली की ओर रवाना हुई। इसी दौरान अलसुबह सनावल की ओर से एक बोलेरो वाहन और एक पिकअप वाहन आते हुए दिखाई दिए।
धान की हेरा-फेरी की आशंका के चलते राजस्व टीम द्वारा दोनों वाहनों को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन वाहन चालकों ने रुकने के बजाय तेज गति से भागने का प्रयास किया। टीम द्वारा पीछा किए जाने पर ग्राम त्रिशुली के पास पांगन नदी में दोनों वाहन फंस गए। इस दौरान पिकअप वाहन का चालक मौके से फरार हो गया, जबकि बोलेरो वाहन के चालक को घेराबंदी कर पकड़ लिया गया।
पूछताछ के दौरान पकड़े गए चालक ने राजस्व टीम के साथ वाद-विवाद किया और मारपीट पर उतारू हो गया। आरोपी ने वाहनों में लदे सामान के संबंध में स्पष्ट जानकारी देने से इनकार किया और गोलमोल जवाब देता रहा। उसने पिकअप वाहन क्रमांक यूपी 64 बीटी 1628 तथा बोलेरो वाहन क्रमांक सीजी 14 सी 0288 को थाने नहीं ले जाने देने की धमकी देते हुए हंगामा किया।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी अवैध धान परिवहन से जुड़े प्रकरणों में मोस्ट वांटेड था और राजस्व विभाग की टीम लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी। आरोपी का नाम धनंजय गुप्ता (22 वर्ष) और सोनभद्र का निवासी है। पुलिस के अनुसार, इसके विरुद्ध पूर्व में भी अवैध धान परिवहन से संबंधित मामलों में संलिप्तता की जानकारी सामने आई है।
स्थिति की गंभीरता और संज्ञेय अपराध की संभावना को देखते हुए विधिवत गवाहों की उपस्थिति में आरोपी को आज गुरुवार को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 170 के तहत गिरफ्तार किया गया।
आरोपी के विरुद्ध कड़ी से कड़ी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बीएनएसएस की धारा 126 एवं 135(3) के अंतर्गत इस्तगासा तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
इस कार्रवाई में तहसीलदार अश्विनी चंद्र, नायाब तहसीलदार आइसी यादव, पटवारी रंजन कश्यप एवं अन्य राजस्व कर्मचारी का योगदान रहा।
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