
नई दिल्ली/रांची। आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और सामाजिक न्याय की आवाज रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन को देश ने उनके जीवन संघर्ष का बड़ा सम्मान दिया है। राज्यसभा सांसद और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण पुरस्कार से नवाजा गया है। लोक कल्याण और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह सम्मान प्रदान किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा करते हुए इस सूची में दिशोम गुरु का नाम शामिल किया।
संघर्ष से नेतृत्व तक का सफर
शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों से भरा रहा। महज 13 वर्ष की उम्र में उनके पिता की हत्या महाजनों द्वारा कर दी गई। इस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने पढ़ाई छोड़कर आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता चुना। उन्हें लगा कि किताबों से ज्यादा जरूरी है अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करना। इसी सोच के साथ उन्होंने सूदखोर महाजनों के खिलाफ आंदोलन की नींव रखी और आदिवासी समाज को संगठित करना शुरू किया।
धान कटनी आंदोलन से मिली पहचान
1970 के दशक में शिबू सोरेन खुलकर महाजनों के खिलाफ मैदान में उतरे। धान कटनी आंदोलन के जरिए उन्होंने सूदखोरों और शोषण के खिलाफ निर्णायक संघर्ष छेड़ा। यही आंदोलन उनकी पहचान बना और वे आमजन के नेता के रूप में उभरे। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, किसानों और आदिवासियों के हक की लड़ाई को समर्पित कर दिया।
तीन बार मुख्यमंत्री, सीमित लेकिन यादगार कार्यकाल
शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें कुल मिलाकर करीब 10 महीने 10 दिन ही मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का अवसर मिला। पहली बार वे मात्र 10 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने। दूसरी बार 28 अगस्त 2008 से 18 जनवरी 2009 तक उन्होंने राज्य की कमान संभाली। तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को मुख्यमंत्री बने, लेकिन यह कार्यकाल भी करीब पांच महीने का ही रहा। सीमित समय के बावजूद वे जननेता के रूप में अपनी अलग छाप छोड़ गए।
राष्ट्रीय राजनीति में भी निभाई अहम भूमिका
शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक थे और लंबे समय तक आदिवासी राजनीति के केंद्र में रहे। यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में उन्होंने केंद्रीय कोयला मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। हालांकि चिरूडीह हत्याकांड में नाम आने के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
4 अगस्त को हुआ निधन
दिशोम गुरु शिबू सोरेन लंबे समय से किडनी सहित कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 4 अगस्त को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश ने एक संघर्षशील जननेता को खो दिया।
पद्म भूषण सम्मान के साथ देश ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आदिवासी समाज की आवाज, संघर्ष और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। शिबू सोरेन का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
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