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    Home»Offbeat Editorial»ओरसा घाटी कोई हादसा नहीं, अक्षम्य गुनाह
    Offbeat Editorial

    ओरसा घाटी कोई हादसा नहीं, अक्षम्य गुनाह

    पूरी व्यवस्था में छिपा है गैर इरादतन हत्या का सार, स्कूल बस को बना दिया यात्री वाहन, जरूरत से अधिक बैठा लिए सवार कौन है 10 घरों के चिराग बुझानेवाले गुनाहगार, कभी न मिटनेवाली टीस और गम में डूबे परिवार
    Vishnu PandeyBy Vishnu PandeyJanuary 21, 2026
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    बलरामपुर, विष्णु पांडेय। ओरसा घाटी कोई हादसा नहीं, अक्षम्य गुनाह है। पूरी व्यवस्था को सूक्ष्मता से खंगालें, तो इसमें सीधे तौर पर गैर इरादतन हत्या का सार छिपा है। आखिर किस वजह से 10 घरों के चिराग एक साथ बुझ गए और इस गुनाह के गुनाहगार कौन हैं, यह सबसे बड़ा सवाल है। इसके लिए तह तक जाने की जरूरत है कि कैसे स्कूल बस को यात्री वाहन बना लिया गया और सीटों से कहीं अधिक यात्रियों को उस पर सवार कर लिया। फिर कैसे ब्रेक फेल हो गए और 10 यात्री असमय काल के गाल में सहसा समा गए। 19 जनवरी को ज्ञान गंगा स्कूल की उस वक्त में जब 80-90 यात्रियों को जब ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा था, तो किसी को यह भान नहीं थी कि लातेहार की ओरसा घाटी उनका आखिरी सफर बन जाएगा। सगाई की रस्म में बलरामपुर के यह सभी शख्स कभी शामिल नहीं हो पाएंगे और उन 10 परिवारों में जमाने भर की खुशियों की जगह जीवनभर का दर्द समाहित हो जाएगा।

    ढलते आंसुओं और उठते सवालों के बीच ओरसा घाट का यह दर्दनाक मंजर सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की खुली नाकामी और लापरवाही से गैर इरादतन सामूहिक हत्या का प्रतीक बन गया है। बलरामपुर जिले के घर-घर में पसरा मातम, एक साथ जलीं दस चिताएं और रोते-बिलखते मासूम चेहरे इस सच्चाई की गवाही दे रहे हैं कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि लापरवाही के आलम में उसे होने दिया गया।

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    बलरामपुर के ज्ञान गंगा स्कूल की जिस बस को सवारी वाहन में तब्दील किया गया, उसमें 80 से 90 ग्रामीणों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया। सवाल सीधा और बेहद गंभीर है, एक स्कूल बस को सवारी ढोने की अनुमति आखिर किसने दी? क्या परिवहन विभाग, प्रशासन और पुलिस की आंखों के सामने यह सब नहीं हो रहा था ? क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को बैठाकर खतरनाक पहाड़ी रास्ते पर भेज देना क्या महज चूक है या फिर मानव जीवन के प्रति घोर उदासीनता ?

    ओरसा घाटी की खतरनाक ढलान और तीखे मोड़ पहले से ही जानलेवा माने जाते हैं। ऐसे मार्ग पर ओवरलोड बस का संचालन सीधे मौत को न्योता देना है। इस लापरवाही की कीमत दस निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। आज जिन घरों में दीप जलने थे, वहां चिताएं जलीं। जिन आंगनों में हंसी गूंजनी थी, वहां सिर्फ सिसकियां बची हैं। मां-बाप ने अपने जवान बच्चों को खोया, बच्चों ने अपने सिर से माता-पिता का साया, और बहनों ने अपने भाइयों को हमेशा के लिए खो दिया।

    यह हादसा इसलिए और अधिक पीड़ादायक है क्योंकि इसे रोका जा सकता था। यदि बस की क्षमता का पालन किया गया होता, यदि अवैध रूप से स्कूल बस को सवारी वाहन बनाने पर समय रहते रोक लगाई गई होती, यदि परमिट और जांच की प्रक्रिया ईमानदारी से निभाई गई होती तो शायद आज दस परिवार उजड़ने से बच जाते।

    सकारात्मक पहलू यही है कि इस गंभीर मामले को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक, सरगुजा रेंज ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी के नेतृत्व में जांच टीम का गठन किया है। टीम को निष्पक्ष, तथ्यपरक और समयबद्ध जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम जरूरी है, लेकिन पर्याप्त नहीं। जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए, यही सबसे बड़ी चुनौती है। दोषी चाहे बस संचालक हो, परमिट देने वाला अधिकारी हो या आंख मूंदकर सब देखने वाली व्यवस्था सबकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    आज सबसे बड़ा सवाल यही है आखिर कब तक सिस्टम की लापरवाही से ऐसे बेगुनाहों की जान जाती रहेगी ? कब तक गरीब और ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर रहेंगे ? और कब तक हर हादसे के बाद कुछ घोषणाएं, कुछ जांचें और फिर वही पुरानी चुप्पी छा जाएगी ?

    ओरसा घाटी की यह त्रासदी चेतावनी है। अगर अब भी सबक नहीं लिया गया, तो अगली बार फिर किसी पहाड़ी मोड़ पर, किसी ओवरलोड वाहन में, किसी और गांव के आंगन उजड़ेंगे। यह वक्त सिर्फ शोक जताने का नहीं, बल्कि व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने का है ताकि भविष्य में कोई और चिता इस लापरवाही की भेंट न चढ़े।

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    10 Died Latehar Bus Accident Orsa Ghati Accident
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    Vishnu Pandey

    विष्णु पांडेय पत्रकारिता में 9 वर्षों के समृद्ध अनुभव के साथ वर्तमान में बहुभाषी समाचार एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। इससे पूर्व वे जून 2025 से अब तक वर्ल्ड विजन न्यूज हिंदी दैनिक में रेजिडेंट एडिटर के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। मई 2023 से जून 2025 तक वर्ल्ड वाइज न्यूज हिंदी दैनिक में रेजिडेंट एडिटर रहे। फरवरी 2019 से मार्च 2023 तक फ्रंट आई वीकली में रेजिडेंट एडिटर के रूप में कार्य किया। वहीं जनवरी 2017 से जनवरी 2019 तक राजधानी रांची न्यूज में विशेष संवाददाता के रूप में सक्रिय पत्रकारिता की।

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