बलरामपुर, विष्णु पांडेय। सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि पर हरतालिका तीज मनाया जाता है। आज मंगलवार सुबह से ही बलरामपुर जिले के रामानुजगंज की सभी मंदिरों में व्रतियों का तांता लगा रहा। रामानुजगंज की प्रमुख मंदिरों प्राचीन राम मंदिर, महामाया मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर एवं अन्य मंदिरों में व्रतियों ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना कर कथा सुनी।
ऐसा मान्यता है कि, माता पार्वती ने कठोर तप करके इस दिन भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। तभी से सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख की कामना से यह व्रत करती हैं। ज्योतिष दृष्टि से इस बार यह तीज अत्यंत शुभ मानी जा रही है क्योंकि कई ग्रहों के संयोग से विशेष योग बन रहे हैं, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।
स्थानीय व्रती कविता बताती है कि, आज हम सभी रामानुजगंज के प्राचीव राम मंदिर में तीज व्रत को लेकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना कर कथा सुनने आए है। यह पर्व अखंड सुहाग का प्रतीक है। हर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह पर्व करती है।
रामानुजगंज प्राचीन राम मंदिर के पुजारी यशपाल दुबे ने बताया कि, आज मंदिर में सुबह से ही नगर की महिलाएं हरतालिका तीज को लेकर पूजा अर्चना करने पहुंची थी। आज सुबह से ही महिलाएं कथा श्रवण कर रही है। भगवान शिव और पार्वती की अटूट प्रेम की प्रतीक के रूप में यह पूजा किया जाता है। दिन भर महिलाएं निर्जला उपवास कर दूसरे दिन की सुबह पारण करने के बाद व्रत को समाप्त करती है।
उन्होंने बताया कि, मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की इसमें पूजा की जाती है। हिमालय की पहाड़ियों में भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती कई वर्षों तक कठोर तपस्या कर किस प्रकार माता पार्वती ने शिव को पाया था यही कहानी इस कथा में सुनाया जाता है।
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