
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। इस वर्ष मकर संक्रांति को लेकर तिथि और समय को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश, पुण्यकाल, षटतिला एकादशी का संयोग और उदया तिथि इन सभी ज्योतिषीय तथ्यों के आधार पर मकर संक्रांति के पर्व को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आई है। जानिए इस वर्ष मकर संक्रांति कब और कैसे मनाई जाएगी, साथ ही क्या रहेगा दान-पुण्य का विशेष महत्व।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में सूर्य 14 जनवरी, बुधवार को दोपहर बाद 3 बजकर 8 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस गोचर के साथ ही पुण्यकाल उसी दिन सुबह 8 बजकर 42 मिनट से प्रारंभ हो जाएगा। इसी आधार पर कुछ स्थानों पर 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति का पर्व मानने की परंपरा है।
हालांकि, इस वर्ष मकर संक्रांति पर एक विशेष धार्मिक संयोग भी बन रहा है। 14 जनवरी को षटतिला एकादशी का संयोग है, जिससे सूर्यदेव के साथ भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने का योग बनता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। एकादशी तिथि होने के कारण श्रद्धालुओं को चावल का सेवन न करने की सलाह दी गई है। चावल का दान किया जा सकता है, जबकि इसका सेवन शनिवार, 17 जनवरी को बनाकर किया जा सकता है। इस दिन खिचड़ी बनाकर दान करना विशेष पुण्यकारी माना गया है।
वहीं, शास्त्रों में पर्व-त्योहार मनाने के लिए उदया तिथि को अधिक मान्यता दी गई है। उदया तिथि के अनुसार सूर्य 15 जनवरी, गुरुवार को मकर राशि में उदित होंगे। इसी कारण धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाएगा। अधिकांश ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य भी उदया तिथि के आधार पर 15 जनवरी को ही पर्व मनाने की सलाह दे रहे हैं।
इस प्रकार, सूर्य के गोचर और पुण्यकाल 14 जनवरी से प्रारंभ होने के बावजूद, धार्मिक परंपरा और उदया तिथि के अनुसार मकर संक्रांति का मुख्य पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। श्रद्धालु इस दिन स्नान, दान, जप और सूर्य उपासना कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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